Tuesday, 10 July 2012

सचल सरमस्त - इश्क कहता है, नहीं, मस्ती में आ



अक्ल और इश्क़..
सचल सरमस्त का एक कलाम और बैत आपको पढ़वाया है कुछ समय पूर्व, परन्तु आज सचल का कलाम खोजते तब सुखद आश्चर्य का अनुभव हुआ जब पीटीवी के एक प्रोग्राम की लिंक मिली. सूफी काव्य पर आधारित 'सफ़र-अल-इश्क'! बकौल लिंक, यह सीरीज़ पारंपरिक और आधुनिक गीत-संगीत का मिश्रण है. लोक, पॉप, क़व्वाली, काफ़ी, धमाल, कत्थक, माइम आदि का 'फ्यूज़न'! और यहाँ मुझे सचल का एक बहुत ही बढ़िया कलाम मिला, सारा रज़ा खान की आवाज़ में - 'अक्ल कहती है कि आ हस्ती में आ, इश्क कहता है, नहीं, मस्ती में आ, . आप भी सुनिए :)


'sama' (sufi whirling) by Mitra Benejad, Tehran (Iran)
कलाम की लिंक :
http://www.youtube.com/watch?v=gslBS-ePPDk


Kalaam: Aqql Kehti Hai K Aa Hasti Mei Aa,
Singers: Sara Raza Khan,
Kalaam: Sachal Sarmast (Translation), 
Music Composition: Khurram Latifi & Salman Adil,
Arrangements: Arif Mani,
Director of Photography: Farrukh Lodhi,
Set Design: Syed Zawar Shah,
Edited by: Khurram Latifi,
A Presentation of PTV Islamabad Center.


बशुक्रिया : खुर्रम लतीफ़ी, डाइरेक्टर-प्रोड्यूसर ''सफ़र-अल-इश्क', पीटीवी 
चित्र बशुक्रिया : Mitra Benejad, Tehran (Iran)

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