Saturday, 9 June 2012

विम्मी (Vimmi) की एक कविता

'In search of identity' bashukriya Shubnum Gill.



कितनी औरतें जीती हैं मुझमें!


अचानक एक दोपहर
धूल खाए पुराने रेडियो पर
‘वक़्त ने किया क्या हसीन सितम,
तुम रहे न तुम, हम रहे न हम’ 
सुनने की इच्छा होती है.
उस  वक़्त यह गीत माँ सुन रही होती है।


आधी रात को उठकर बिना कपड़े उतारे
शावर के नीचे खड़ी हो जाती हूँ
बदन सुखाए बिना आकर लेट जाती हूँ
तब पलंग पर बुआ करवट ले रही होती है।

पंद्रह साल पुरानी लाल साड़ी 
संदूक से निकालकर उलटने-पलटने लगती हूँ
ज़िन्दगी की तरह उसको भी 
तह लगाकर वापस उसी जगह रख देती हूँ
साड़ी को निहारती
काली पड़ गई ज़री-सी वे आँखें मौसी की हैं।

लहसुन की कलियों को दरदराते हुए
दस्ता मेरे हाथ से छूट जाता है
दूर कहीं
नानी की सास की दहाड़ गूँज उठती है
वे कँपकँपाते हाथ पाँव नानी के हैं। 

अब समझ आता है मुझे 
इतने बरसों से यूँ ही बेचैन नहीं हूँ मैं
यूँ ही ऐब्नाॅर्मल नहीं दिखती सबको
किसी एक का नहीं, इतनी सारी औरतों का साया है मुझ पर।


13 comments:

  1. HAAN YE MEIN HOON!
    IS JANAM MEIN APNE AAS-PASS KI
    NA JANE KITNI PARCHHAIYON KO
    JANE-ANJANE APNE MEIN GHOLE
    UNHEN APNE ASTITVA KA HISSA SAMAJHKAR
    JEE RAHI HOON MAIN
    HAAN YEHI MEIN HOON!
    IS MEIN MEIN KITNA MERA VIJOOD HAI
    KITNA IN PARCHHAIYON KA
    TATOLTE - TATOLTE APNE ABNORMAL HONE KA
    AHISAS HO RAHA HAI MUJHKO!
    HAAN YEHI MEIN HOON!
    ABNORMAL SI MEIN!

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  2. हाँ ये मैं हूँ !
    हाँ ये मैं हूँ !
    इस जन्म में अपने आस -पास की
    न जाने कितनी परछाइयों को
    जाने -अनजाने अपने में घोले
    उन्हें अपने अस्तित्व का हिस्सा समझकर
    जी रही हूँ मैं
    हाँ येही में हूँ !
    इस मैं में कितना मेरा विजूद है
    कितना इन परछाइयों का
    टटोलते - टटोलते अपने अब्नोर्मल HONE का
    अहिसास हो रहा है मुझको !
    हाँ येही में हूँ !
    अब्नोर्मल सी मैं !

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    1. सुन्दर.. शुक्रिया यहाँ शेयर करने के लिए..

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  3. बहुत ही सुन्दर ! एक स्त्री की कशमकश को सुन्दर भावो को बंधती कविता

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  4. sorry Vimmiji, uss din broadband ka router muktibodh ki kavita batate batate achanak kharab ho gaya aur mobile par bahut comfortable nahi hun... aaj bashukriya shagufta MTNL se router badalkar mila.. tab maloom hua itni sunder kavita se pure 3 din vanchit raha.. dhanyawad:)

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    1. Shukriya.. aur koi baat nahi Chitt Ranjan, kabhi bijli to kabhi net rode atkata hai :) Shagufta ko dhanyawad :)

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  5. बहुत सुन्दर विम्मी जी...
    पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ...
    बहुत सुन्दर लेखन..

    अनु

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    1. बहुत शुक्रिया अनु जी. आपका स्वागत है :) अच्छा लगा आपका आना :)

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  6. बहुत शुक्रिया अनु जी. आपका स्वागत है :) अच्छा लगा आपका आना :)

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